देश (Desh explained in hindi):
प्रत्येक मनुष्य अपने देश (Desh) को दिल से प्यार करता है किंतु, कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जिनके सोचने का आधार, पूर्वाग्रही होता है अर्थात उनके लिए देश के मायने अलग होते हैं| उनकी परिभाषाएँ भिन्न होती हैं| आज पूरे विश्व ने भूभाग से लेकर, समुद्री तल तक अपनी सीमाएं बना रखीं हैं| जिनके अंतर्गत, नियमों के आधार पर लोग रहते हैं इन्हें, नागरिक कहा जाता है| प्राचीन काल से आज तक कई देश बने और मिटे क्योंकि, मानव अहंकार ने उसे कभी एक नहीं रहने दिया| भले ही वह मनुष्य हों लेकिन, सबके स्वार्थ अलग है| जानवरों में एक ही तरह की प्रवृत्ति पाई जाती है इसलिए, वह अपने स्वाभाविक रूप में आनंददायक जीवन व्यतीत करते हैं किंतु, मनुष्य अपने स्वभाव से विपरीत, अपनी शारीरिक पहचान को महत्व देने लगता है जिससे, देशों में सीमा रेखा खींचना अनिवार्य हो जाता है अन्यथा, क्या आवश्यकता एक मनुष्य को, दूसरे मनुष्य से भयभीत होने की| जबकि, हम अपने परिचित व्यक्तियों के साथ मिलकर रहना जानते हैं, फिर भी ऐसा क्या है जो, हमें एक नहीं होने देता? इसे समझने के लिए हमें कुछ प्रश्नों की ओर चलना होगा|
- देश क्या है?
- देश भक्ति क्या है?
- देशद्रोह क्या है?
- देश कैसे चलता है?
- देश को महाशक्ति कैसे बनाएं?
- राष्ट्रीय एकता कैसे बनाई जाती है?
- आदर्श देश कैसा होना चाहिए?

देशों की संवैधानिक प्रक्रिया नागरिकों का मूल्य निर्धारण करती है जिससे, यह तय किया जाता है कि, कौन प्रधानमंत्री बनेगा, कौन राष्ट्रपति बनेगा? हालांकि, कुछ ऐसे देश भी हैं जहाँ, एक राजा पारंपरिक रूप से चुना जाता है जो, सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करता है| ऐसे देशों को तानाशाही समझा गया है| आज पूरा विश्व, लोकतांत्रिक व्यवस्था को सर्वश्रेष्ठ मानता है क्योंकि, प्रत्येक मनुष्य इस पृथ्वी पर स्वतंत्र होना चाहिए| ऐसा न हो कि, उसके पैदा होते ही उसे पता चले कि, वह पराधीन है और उसके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य बन जाए कि, कैसे वह स्वतंत्रता प्राप्त कर सकता है क्योंकि, स्वतंत्रता के लिए बड़ी बड़ी क्रांतियाँ हुई है| अगर मनुष्य को किसी भी भांति के बंधन में रखा गया तो, वह अवश्य विरोध करेगा| मानव का स्वभाव है मुक्ति| इसके अतिरिक्त, कोई भी विषय वस्तु उसे संतुष्टि प्रदान नहीं कर सकती| भले ही राजनीतिक सोच ने देशों का विभाजन कर दिया हो लेकिन, मनुष्य इस प्रकृति से विभाजित होकर नहीं रह सकता| मनुष्य को एक न एक दिन, अपने मतों का विकेंद्रीकरण करना ही होगा| जिस प्रकार, पर्यावरण परिवर्तन पृथ्वी की सबसे बड़ी समस्या है उसी प्रकार, मानवीय विचारों में भिन्नता भी, मानव जाति के लिए घातक है| आज तकनीकी दृष्टि से भले ही, मनुष्य उन्नति कर रहा है किंतु, उसकी मानवीय चेतना उतनी ही गति से, निचले स्तर पर गिरती जा रही है| आज बड़े बड़े देश, प्राकृतिक संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं| आपने पढ़ा होगा, जब मनुष्य आदिमानवों था तो, वह एक दूसरे को मारकर खा जाया करता था क्योंकि, उस समय संसाधनों की कमी थी, मनुष्य कृषि करना नहीं जानता था लेकिन, धीरे धीरे वह समझदार होता गया और अपनी भाषा शैली और संस्कृति के अनुसार, अपनी सीमाएं बनाने लगा किंतु, यहाँ भी वह उसी आदिम सोच के प्रभाव में निर्णय लेता रहा जिससे, बड़े बड़े युद्धों का उद्घोष हुआ, लाखों लोगों ने अपनी जान गंवायी और अभी भी यह, निरंतर चला आ रहा है| बल्कि यूँ कहें कि, आज तो किसी भी छोटे देश को, रातों रात नष्ट किया जा सकता है| हालाँकि, प्रत्येक देश में आधे से अधिक जनसंख्या देशभक्त होती है| अतः सभी देश एक दूसरे से सुरक्षित रहते हैं| निम्नलिखित बिंदुओं में इसका एक स्पष्टीकरण दिया गया है|
देश क्या है?

संवैधानिक या सामाजिक नियमों के आधार पर, देश का निर्माण होता है| देश वह सीमा है जिसके अंतर्गत, बहुत से नागरिक रहते हैं| जिनकी भाषाएँ, संस्कृति या खानपान विभिन्न हो सकते हैं लेकिन, उनका अपने देश की, न्यायिक विचारधारा पर एकमत होना अनिवार्य है| सभी देश प्राचीन मान्यताओं या आधुनिकीकरण के आधार पर चलते हैं| देश के निर्माण में सभी नागरिकों का योगदान होता है| छोटे से लेकर बड़ों वर्गों तक, कार्यों का विभाजन किया जाता है और उसी श्रेणी के आधार पर, लोगों को अपने देश के लिए, कार्य करने का अवसर प्राप्त होता है| हालाँकि, कुछ ऐसे भी नागरिक होते हैं जो, स्वतंत्र रहते हुए अपने देश को, अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुँचाते हैं| कोई भी देश, भावनाओं का समूह होता है जो, केवल आंतरिक प्रेम से ही बनाया जा सकता है|
देश भक्ति क्या है?

देश के नागरिकों का उच्चतम योगदान देश भक्ति कहलाता है| देश भक्ति के चार मार्ग है, रक्षात्मक, बौद्धिक, सृजनात्मक और सेवा कार्य जहाँ, रक्षात्मक दृष्टिकोण से सेना पुलिस और अन्य तरह के सुरक्षाकर्मी आते हैं| उसी प्रकार बौद्धिक देशभक्ति के अंतर्गत, शिक्षा देने वाली संस्थाएं या व्यक्ति आते हैं| सृजनात्मक देश भक्ति के आधीन, देश की अर्थव्यवस्था बढ़ाने वाले कार्य आते हैं और अंत में, जो कदाचित् सबसे महत्वपूर्ण भूमिका वाला क्षेत्र है, सेवा कार्य जिसके अंतर्गत, चिकित्सालय, स्वच्छता, सैनिक, नि स्वार्थ भाव से ही चलने वाले संस्थान, छोटे मोटे कार्य करने वाले सभी व्यक्ति आते हैं| देश भक्ति के लिए, केवल युद्ध लड़ना ही आवश्यक नहीं होता बल्कि, अपने देश के नागरिकों का जीवन स्तर उठाना भी, देश भक्ति के अंतर्गत ही आता है| हालाँकि, कुछ लोगों की सोच स्थानीय एकता की नहीं बल्कि, धार्मिक एकता के अनुसार देशों का निर्माण करने की होती है जबकि, आज युग रूपांतरित चुका है| विज्ञान ने पुरानी धारणाओं को चुनौती देना आरम्भ कर दिया है| पहले जो बातें रहस्यमयी हुआ करती थीं, आज उन्हें विज्ञान के माध्यम से, उजागर किया जा सकता है इसलिए, किसी तरह के अंधविश्वास को, आज के युवा मानने को तैयार ही नहीं| अतः देश की सीमाएं संवैधानिक बनायी जाती हैं और कठोर नियमों के साथ उनका पालन करने के लिए, नागरिकों को बाध्य किया जाता है हालाँकि, लोगों को देशभक्ति सिखाने के लिए, यह विधि कारगर होती है किंतु, यदि सभी नागरिक अपना उत्तरदायित्व समझकर, देश के लिए कार्य करने लगें तो, संविधान का पालन करने की बाध्यता ही नहीं बचेगी| फिर घर घर से देश भक्त ही जन्म लेंगे|
देशद्रोह क्या है?

देश के मूल्यों के विरुद्ध, किए गए कार्यों को देशद्रोह कहा जाता है| प्रत्येक देश ने अपनी सांस्कृतिक, राजनैतिक और आर्थिक व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए, नियमावली तैयार की है और जब कोई व्यक्ति या संस्थाएँ, इनके विपरीत कार्य करते हैं तो, वह देश द्रोही कहलाते हैं| सभी देश अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं| अतः देशद्रोह को लेकर, कठोर दंडनीय व्यवस्था बनायी गईं हैं| हालाँकि देशद्रोह की परिभाषा अति संकुचित है जिसके अनुसार, देश को केवल प्रत्यक्ष तौर पर हानि पहुँचाने वाले व्यक्तियों को ही देशद्रोही समझा जाता है लेकिन, यदि बृहद रूप से देखा जाए तो, देश में रहने वाला प्रत्येक वह व्यक्ति देशद्रोही है जो, अपने उत्तरदायित्व से पीछे हटता है या अपने निजी स्वार्थों को प्राथमिकता देते हुए, भ्रष्टाचार को बढ़ाता है| उदाहरणार्थ, जो कर्मचारी अपने काम में जानबूझकर लापरवाही करता है| जो व्यापारी अपने लाभ को बढ़ाने के लिए, प्रकृति का शोषण कर रहा है| जो लोग, अपने अहंकार में किसी अन्य को हीन समझ कर, दुर्व्यवहार करते हैं, इन सभी को देशद्रोही की श्रेणी में रखा जाना चाहिए| क्योंकि, यही नैतिक मूल्य ही देश का निर्माण करते हैं| यदि इन मूल्यों को क्षति पहुँचाई गई तो, कोई भी देश एकता से नहीं रह सकता|
देश कैसे चलता है?

देश को चलाने के लिए, पारिस्थितिकी तंत्र का गठन किया जाता है| जिसके केंद्र में, अर्थव्यवस्था को रखते हुए, योजनाएँ बनायी जाती हैं और उन्हीं योजनाओं के आधार पर, संस्थाओं का निर्माण होता है जो, देश को सुचारु रूप से चलाने के लिए, व्यवस्था प्रदान करती हैं| जैसे रेलवे, सेना, व्यापारिक संगठन, स्वयं सेवी संस्थाएं और व्यक्ति विशेष| वस्तुतः अलग अलग देशों में, अपनी मान्यताओं के अनुसार, नियम कानूनों के अंतर्गत, उत्तरदायित्व का निर्धारण किया जाता है जिन्हें, देश में रहने वाले नागरिक, अपनी योग्यताओं के अनुसार चुनते हैं| ऐसी व्यवस्था, सरकारी कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आती है| वहीं दूसरी ओर आम नागरिक, देश के संविधान के अनुसार विनिमय प्रक्रिया का निर्माण करते हैं जहाँ शिक्षा से लेकर, उपभोगी विषय वस्तुओं तक, हस्तांतरित किया जाता है, जो देश की अर्थव्यवस्था बढ़ाने में सहायक है| हालाँकि, आज अधिकतर देश वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने लगे हैं जहाँ, वह अधिक से अधिक तकनीकी क्षेत्र को विकसित कर रहे हैं ताकि, मानव बल आवश्यकताओं की पूर्ति, समाप्त की जा सके| आने वाले समय में, सामान्य बुद्धि से किए जाने वाले कार्यों को, वैज्ञानिक संयंत्रों के द्वारा किया जाएगा तब, कदाचित् देश को चलाने के लिए, नागरिकों की उतनी आवश्यकता न पड़े किंतु, आज सभी नागरिकों को कंधे से कंधा मिलाकर, अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना ही होगा तभी, एक सुव्यवस्थित देश की रचना की जा सकेगी|
देश को महाशक्ति कैसे बनाए?

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था उसका सूचकांक होती है जहाँ, बढ़ती अर्थव्यवस्था को शक्ति के रूप में प्रदर्शित किया जाता है और इसके विपरीत नकारात्मक अर्थव्यवस्था, दुर्बलता का प्रतीक होती है| अतः जो देश, आर्थिक तौर पर सबसे अधिक धनवान होगा वही, महाशक्ति बनेगा लेकिन, यहाँ बात केवल इतनी सी नहीं है| माना कि, आज का समय तकनीकी विकास का है किन्तु, विकास के साथ साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना भी आवश्यक है| जो देश अर्थव्यवस्था बढ़ाने के लिए, खनिज सम्पदा पर आधारित होता है वह, कभी शक्तिशाली नहीं बन सकता| कहने का आशय है कि, देश की शक्ति सकारात्मक अर्थव्यवस्था वृद्धि में होती है जिसके लिए, सृजनात्मक विचारधारा का अनुगमन करना चाहिए और सबसे प्रमुख, देश के सभी नागरिकों को, आधुनिक शिक्षा के साथ, आध्यात्मिक शिक्षा देना भी अनिवार्य है अन्यथा, मनुष्य अपने स्वार्थ में विकास तो करेगा किंतु, वह प्राकृतिक मूल्यों को भूलकर, सर्वनाश कर बैठेगा जो, पूरे विश्व के लिए घातक होगा|
राष्ट्रीय एकता कैसे बनाई जाती है?

किसी भी देश की स्थापना, विचारधारा केंद्रित होती है हालाँकि, विचारधारा का दृष्टिकोण वैज्ञानिक या धार्मिक होता है| कुछ देश ऐसे हैं जो, सामाजिक आधार पर अपने नियम बनाते हैं और कुछ ऐसे हैं जो, लोकतांत्रिक व्यवस्था को देखते हुए, सभी के विचारों का सम्मान रखते हैं| किसी भी देश में एकता बनाने के लिए, लोकतांत्रिक प्रक्रिया अनिवार्य होती है क्योंकि, जहाँ लोगों को अपना मत रखने की स्वतंत्रता न हो, वहाँ एकता बन पाना असंभव है| सभी नागरिकों को शिक्षा के माध्यम से, अपने देश के नैतिक मूल्यों से अवगत कराना चाहिए| प्रत्येक नागरिक को, अपने देश से प्रेम दबाव में नहीं, दिल से होना चाहिए| देश के सभी नागरिकों का समान अधिकार होना चाहिए| निर्धन, पिछड़े परिवारों को आर्थिक तौर पर सहायता प्रदान की जानी चाहिए तभी, क्रान्तिकारी विरोध को निष्क्रिय किया जा सकेगा| किसी भी देश की सरकार को, यह निश्चित करना चाहिए कि, उनके देश में एक भी नागरिक, मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहे भले ही, इसके लिए अत्यधिक धन अर्जित कर चुके व्यक्तियों से, अधिक कर वसूलना पड़े चूँकि, यह पृथ्वी सभी जीवों को सामान्य अधिकार देती है, तो फिर क्यों किसी को, अतिनिर्धन रहना पड़े? जबकि, आज सभी देश धनाढ्य लोगों से भरे पड़े हैं| देश में रहने वाले धनी व्यक्तियों का कर्तव्य है कि, एक निश्चित समय के बाद धन का लालच छोड़कर, निर्धन और वंचित नागरिकों की सहायता करें| उन्हें भी अपना परिवार समझें ताकि, किसी भी देश में मानव, अनुकूलित परिस्थितियों में रह सकें तभी, देश का प्रत्येक व्यक्ति आपस में जुड़ाव अनुभव करेगा और एकता का भाव प्रबल होता जाएगा|
आदर्श देश कैसा होना चाहिए?

कोई भी देश, तभी आदर्श बन सकता है जब वह, छोटे से लेकर बड़े जीव तक, भेदभाव न करे अर्थात जहाँ भांति भांति के पशु-पक्षी, वन्यजीव, जात-पात, स्त्री-पुरुष, किन्नर इत्यादि के लिए, समान भाव हो| देखा गया है, किसी देश में हाथी को लोकप्रिय माना जाता है तो, किसी देश में गाय को, किसी में शेर को तो, किसी में साँप को, यहाँ तक कि, कई ऐसे देश भी हैं जहाँ, छोटे कीड़े मकोड़े तक को सम्मान दिया जाता है इसलिए, सभी तरह के जीवों का संरक्षण करने वाला देश ही, आदर्शवादी कहलाने योग्य होगा| देश का गौरव तभी बढ़ता है जब वह, अपने नागरिकों की भावनाओं का सम्मान करें| साथ ही साथ, आने वाली पीढ़ी के लिए, सुरक्षित वातावरण का निर्माण करें| ऐसा न हो कि, अधिक धन कमाने की चाह में, सभी जानवरों का जीवन संकट में डाल दिया जाए चूँकि यही कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षियों, जीव-जन्तु, सर्व संप्रदाय इत्यादि मनुष्य के लिए, सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते हैं| यदि इनमें से कोई को भी विलुप्त हुआ तो, निश्चित ही इसके दुष्परिणाम होंगे| बड़े खेद की बात है कि, आज पूरे विश्व में एक भी देश आदर्शवादी छवि का प्रतीक नहीं है|
इस पृथ्वी पर सभी प्राणियों को जीने का समान अधिकार है| विश्व को, प्रकृति का न्यूनतम उपभोग मार्ग अपनाना ही होगा अन्यथा, किसी भी देश का वातावरण, मनुष्य के जीने योग्य नहीं बचेगा| देश के सभी नागरिकों को, किसी एक विचार से केंद्रित होना चाहिए भले ही, इसका आधार धर्म हो लेकिन, वह सभी के लिए समान होना चाहिए| जितने भी देश बर्बाद हुए उन्होने, केवल अपने नागरिकों के स्वार्थ के लिए युद्ध करना ही सीखा है इसलिए, देशों के शीर्ष नेतृत्व का कर्तव्य है कि, वह पूरी दुनिया के मनुष्यों को एकता में रखने का संकल्प करें ताकि, आने वाला समय मानव जाति के लिए सुनहरा उदय हो और सभी देश शांति से रह सकें| किंतु, मनुष्य का अहंकार उसके निजी स्वार्थों को बढ़ावा देते हुए, शांति स्थापित नहीं करने देगा क्योंकि, यह रहस्य तो, आध्यात्मिक ज्ञान से ही जाना जा सकता है इसलिए, देश के नागरिकों की आध्यात्मिक शिक्षा होना भी अनिवार्य है ताकि, वह अपने स्वार्थ से अधिक, दूसरों के दुख, दर्द को महत्व दें तभी, विश्व शांति स्थापित की जा सकेगी|